9+ 1 7 किसी शायर ने अंतिम यात्रा का क्या खूब वर्णन किया है….. था मैं नींद में और. मुझे इतना सजाया जा रहा था…. बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था…. ना जाने था वो कौन सा अजब खेल मेरे घर में…. बच्चो की तरह मुझे कंधे पर उठाया जा रहा था…. था पास मेरा हर अपना उस वक़्त…. फिर भी मैं हर किसी के मन से भुलाया जा रहा था… जो कभी देखते भी न थे मोहब्बत की निगाहों से…. उनके दिल से भी प्यार मुझ पर लुटाया जा रहा था… मालूम नही क्यों हैरान था हर कोई मुझे सोते हुए देख कर…. जोर-जोर से रोकर मुझे जगाया जा रहा था… काँप उठी मेरी रूह वो मंज़र देख कर…. . जहाँ मुझे हमेशा के लिए सुलाया जा रहा था…. . मोहब्बत की इन्तहा थी जिन दिलों में मेरे लिए…. . उन्हीं दिलों के हाथों, आज मैं जलाया जा रहा था!!!

किसी शायर ने अंतिम यात्रा

का क्या खूब वर्णन किया है…..

था मैं नींद में और.

मुझे इतना

सजाया जा रहा था….

बड़े प्यार से

मुझे नहलाया जा रहा

था….

ना जाने

था वो कौन सा अजब खेल

मेरे घर

में….

बच्चो की तरह मुझे

कंधे पर उठाया जा रहा

था….

था पास मेरा हर अपना

उस

वक़्त….

फिर भी मैं हर किसी के

मन

से

भुलाया जा रहा था…

जो कभी देखते

भी न थे मोहब्बत की

निगाहों

से….

उनके दिल से भी प्यार मुझ

पर

लुटाया जा रहा था…

मालूम नही क्यों

हैरान था हर कोई मुझे

सोते

हुए

देख कर….

जोर-जोर से रोकर मुझे

जगाया जा रहा था…

काँप उठी

मेरी रूह वो मंज़र

देख

कर….

.

जहाँ मुझे हमेशा के

लिए

सुलाया जा रहा था….

.

मोहब्बत की

इन्तहा थी जिन दिलों में

मेरे

लिए….

.

उन्हीं दिलों के हाथों,

आज मैं जलाया जा रहा था!!!

please read

इनके पास है तीसरा नेत्र

ऊपर वाला अगर कहीं कोई कमी रखता है तो बडे ढंग से उसकी भरपाई भी कर देता है। हर बार जब मैं किसी शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति को देखता हूं तो मेरे मन में दया, करुणा या फिर सहानुभूति जैसे भाव बिल्कुल नहीं जागते। बल्कि पहली फुरसत में अगर मेरा सामना मेरे किसी ऐसे मित्र से पडता है तो उसमें किसी विलक्षण प्रतिभा को खोजने का प्रयास करता हूं।

शारीरिक रूप से चैलेंज्ड लोग अक्सर थोडे संकोची, कम बोलने वाले होते हैं। बस एक बार इनको खामोशी से बाहर निकाल लीजिए तो मैं पूरे यकीन से कहता हूं कि इसमें फायदा इनका नहीं, हमारा ही होने वाला है। इस यकीन की जड में शायद मेरा बचपन है। ..और भातखंडे संगीत महाविद्यालय की तबले की वह क्लास है, जिसमें मेरा एक सहयोगी- सतीश अग्रवाल, नेत्रहीन था। शुरू-शुरू में कोई भी उस पर ध्यान नहीं देता था। यहां तक कि हमारे गुरुजी भी लगभग टालने की नीयत से बस उसका हाथ तबले पर रखवा देते थे और कहते थे, सुनो और स्टूडेंट क्या बजा रहे हैं। एक-डेढ घंटे की क्लास  Continue reading

first thing and speak

एक लडका लडकी देखने गया।उसे बहुत देर से पेशाब लगा था।उसने लडकी से कहा पेशाब वाला जगह दिखाईए ।

लडकी शर्माके बोली पहले आप अपना दिखाई ए।